सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थल

अंगकोरवाट | अंकोरवाट (Angkor Wat)

भूमिका अंगकोरवाट (Angkor Wat) कंबोडिया के सिएम रीप (Siem reap) के पास अंगकोर क्षेत्र में स्थित एक विशाल मंदिर परिसर (temple complex) है। यह विशाल मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। कम्बोडिया का प्राचीन नाम कम्बुज (कंबुज) मिलता है। जिसका निर्माण ख्मेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन् द्वितीय ने १२वीं शताब्दी के प्रथम चरण में करवाया […]

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अंग (Anga)

संक्षिप्त परिचय नाम अंग (अङ्ग) राजधानी चंपा (चम्पा) विस्तार मुंगेर, भागलपुर जनपद राज्य बिहार स्थिति गंगा नदी के तट पर प्रथम उल्लेख अथर्ववेद महाजनपदकाल १६ महाजनपदों में एक अंग का इतिहास अंग का विवरण वैदिक साहित्य, महाभारत, बौद्ध, जैन व अन्य संस्कृति ग्रन्थों में मिलता है— उत्तर-वैदिक काल अंग देश का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद ५/२२/१४

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अंगकोरथोम (Angkor Thom)

संक्षिप्त परिचय नाम अंगकोरथोम (Angkor Thom) लिप्यंतरण अंगकोर थॉम / अंकोरथोम / अंकोरथॉम निर्माता जयवर्मन् सप्तम् देश कंबोडिया स्थिति सिएम रीप नदी (Siem reap River) के तट पर महत्त्व विश्व धरोहर स्थल, १९९२ (युनेस्को) व्युत्पत्ति (Etymology) अंगकोरथोम और अंकोरथोम एक ही स्थल के दो पृथक्-पृथक् हिन्दी लिप्यंतरण (लिपि + अंतरण) हैं। रोमन लिपि में इसे

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अंकोटक (Ankotaka)

संक्षिप्त परिचय प्राचीन नाम अंकोटक (Ankotaka) वर्तमान नाम अकोट (Akota) जनपद वडोदरा (बड़ौदा) राज्य गुजरात देश भारत स्थिति विश्वामित्री नदी (Vishwamitri River) के दायें तट पर विवरण जैसा कि हमें ज्ञात है कि प्रस्तर युग (Stone age) से ही सौराष्ट्र क्षेत्र में मानव निवास के साक्ष्य हमें मिलने लगते हैं। साबरमती, माही, नर्मदा और उनकी

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अंकाई-तंकाई (Ankai-Tankai) | अणकिटणकी

भूमिका अंकाई-तंकाई या अंकाई-टंकाई (Ankai-Tankai) का एक अन्य नाम अणकिटणकी है। यह स्थल जैन धर्म से सम्बन्धित है। यहाँ पर ७ गुफाएँ एक पहाड़ी में काटकर बनायी गयी। यहाँ पर आमने-सामने युगल गिरि-दुर्ग स्थिति है, जिनके नाम अंकाई दुर्ग और तंकाई दुर्ग है। सामान्य परिचय प्राचीन नाम अणकिटणकी वर्तमान नाम अंकाई-तंकाई (अंकाई-टंकाई) तालुका येओला (Yeola)

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अंकलेश्वर (Ankleshwar)

सामान्य परिचय देश भारत राज्य गुजरात जनपद भरूच उल्लेख महाभारत में भौगोलिक स्थिति अंकलेश्वर भरूच से लगभग ८ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। प्राचीन समय में नर्मदा के तट पर यह स्थित था परन्तु वर्तमान में यह नदी लगभग ५ किलोमीटर उत्तर में प्रवाहित हो रही है। प्राचीन उल्लेख यह कथा हमें महाभारत के आदि

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वाराणसी ( काशी )

भूमिका वाराणसी भारतीय उप-महाद्वीप पर सबसे पुरातन ऐसी नगरी है जहाँ मानव आवास अपनी निरन्तरता बनाये हुए हैं। महाजनपद काल में वाराणसी काशी महाजनपद की राजधानी थी। बौद्ध साहित्यों में वर्णित छठी शताब्दी ई० पू० के छः महानगरों में से वाराणसी भी एक थी। यह पुरातन समय से ही धार्मिक, सांस्कृतिक, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों

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साकेत

भूमिका साकेत अयोध्या ( उत्तर प्रदेश ) का एक उपनगर था। इसकी स्थापना का विवरण हमें रामायण में मिलता है। इसकी स्थापना बौद्धकाल से पहले या निकट पूर्व बौद्धकाल में बना हुआ नगर था। बौद्ध ग्रंथ ‘महापरिनिर्वाण सूत्र’ में इसकी गणना छठीं शताब्दी ई० पू० के छः महानगरों में की गयी है।सामान्य लोक अनुश्रुति में

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श्रावस्ती ( सहेत-महेत)

भूमिका श्रावस्ती कोसल महाजनपद की राजधानी थी। बौद्ध ग्रंथ ‘महपरिनिर्वाणसूत्र’ के अनुसार यह छठीं शताब्दी ई०पू० की प्रसिद्ध छः महानगरों में से एक थी। श्रावस्ती की पहचान उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद के ‘सहेत-महेत’ से की गयी है। यहाँ पर इसके ध्वंसावशेष प्राप्त होते हैं। श्रावस्ती राप्ती नदी ( अचिरावती नदी ) के दायें तट

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राजगृह ( राजगीर )

भूमिका बिहार राज्य के नालन्दा जनपद में वर्तमान राजगीर नामक स्थान ही राजगृह है। यहाँ मगध महाजनपद की प्रारम्भिक राजधानी थी। इसका नाम गिरिब्रज भी मिलता है। राजगृह चतुर्दिक् पहाड़ियों से घिरा हुआ था। महाभारत काल में राजगृह एक तीर्थ माना जाता था। नामकरण प्राचीन काल में राजगीर को एक से अधिक नामों से जाना जाता

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