बोधिसत्व

बोधिसत्व महायान का आदर्श बोधिसत्व है। बोधिसत्व ऐसे व्यक्ति हैं जो निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं परन्तु अन्य लोगों के निर्वाण में सहायता करने के लिए आते। बोधिसत्व मानव या पशु किसी भी रूप में हो सकते हैं। कुछ बोधिसत्व निम्न हैं :— अवलोकितेश्वर – ये प्रधान बोधिसत्व हैं। इनका एक अन्य नाम पद्मपाणि भी है। पद्मपाणि […]

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कुछ प्रमुख बौद्ध विद्वान एवं दार्शनिक

बौद्ध विद्वान एवं दार्शनिक बौद्ध धर्म में बहुत सारे विद्वान और दार्शनिकों का आविर्भाव हुआ जिन्होंने धर्म और दर्शन के विकास में योगदान दिया। इनमें से कुछ प्रमुख बौद्ध विद्वान एवं दार्शनिक निम्न हैं :— अश्वघोष ये कनिष्क के समकालीन एक प्रतिभासम्पन्न कवि, नाटककार, संगीतकार, विद्वान और तर्कशास्त्री थे। अश्वघोष ने बुद्धचरित, सौन्दरानन्द और शारिपुत्र-प्रकरण की

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बुद्ध से सम्बंधित व्यक्ति

बुद्ध से सम्बंधित व्यक्ति महात्मा बुद्ध से सम्बंधित व्यक्ति संख्या में बहुत अधिक थे जिनमें से कुछ के नाम उल्लेखनीय है :—   बुद्ध के प्रमुख शिष्य सारिपुत्र, मोद्गलायन, उपालि, सुनीत, अनिरुद्ध, अनाथपिण्डक, जीवक, महाकश्यप, बिम्बिसार, अजातशत्रु, प्रसेनजित, आनन्द आदि। सारिपुत्र ( ब्राह्मण ) और मोद्गालयन दोनों राजगृह के निवासी थे। इन दोनों की मृत्यु

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योग दर्शन

योग दर्शन परिचय भारतीय दर्शनों में योग ही वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक लोकप्रिय है। योग हमें आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण का व्यावहारिक मार्ग बताता है। २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग दर्शन सांख्य के साथ घनिष्ठ रूप से सम्बंधित है। यह सांख्य दर्शन का व्यावहारिक पक्ष है। इसके प्रवर्तक

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बौद्ध धर्म के अन्य प्रमुख उपसम्प्रदाय

बौद्ध धर्म के अन्य प्रमुख उपसम्प्रदाय वज्रयान ईसा की पाँचवीं या छठवीं शताब्दी से बौद्ध धर्म के ऊपर तंत्र-मंत्रों का प्रभाव बढ़ने लगा जिसके फलस्वरूप वज्रयान नामक नये सम्प्रदाय का जन्म हुआ। इस विचाधारा में मंत्रों और तांत्रिक क्रियाओं द्वारा मोक्ष प्राप्त प्राप्ति का मार्ग प्रस्तुत किया गया। वज्रयान विचारधारा में ‘वज्र’ को एक अलौकिक

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महायान की शाखाएँ

महायान की शाखाएँ माध्यमिक ( शून्यवाद ) सम्प्रदाय इस मत के प्रवर्तक नागार्जुन हैं। नागार्जुन ने ‘माध्यमिककारिका’ की रचना की। इसे सापेक्षवाद भी कहा जाता है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न हुई है और वह पर-निर्भर है। नागार्जुन ने ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ को ही शून्यता कहा है। इस मत में महात्मा बुद्ध

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हीनयान की शाखायें

भूमिका हीनयान की शाखायें दो हैं। एक – वैभाषिक उपसम्प्रदाय और द्वितीय- सौत्रान्तिक उपसम्प्रदाय। जिनका विवरण निम्नवत है। वैभाषिक उपसम्प्रदाय यह बौद्ध धर्म के हीनयान शाखा का उपसम्प्रदाय है। इसकी उत्पत्ति कश्मीर में हई। विभाषाशास्त्र पर आधृत होने के कारण इसे वैभाषिक नाम दिया गया। वैभाषिक मतानुयायी ‘चित्त और बाह्य वस्तु’ के अस्तित्व को स्वीकार

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बौद्ध संगीतियाँ

बौद्ध संगीतियाँ बौद्ध धर्म की विकास-यात्रा में ४ बौद्ध संगीतियों / महासभाओं का महत्वपूर्ण स्थान है :— प्रथम बौद्ध संगीति  स्थान – सप्तपर्णि गुफा, राजगृह समय – ४८३ ई०पू० शासनकाल – अजातशत्रु  अध्यक्ष – महाकस्सप उद्देश्य – बुद्ध की शिक्षाओं का संकलन करना था।  महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तत्काल बाद यह संगीति आयोजित की गयी। 

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बौद्ध संघ

 भूमिका बौद्ध संघ का बौद्ध धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह बौद्ध त्रिरत्नों ( बुद्ध, धम्म और संघ ) में शामिल है। ऋषिपत्तन में अपना प्रथम उपदेश ( धर्मचक्रप्रवर्तन ) देने के बाद बुद्ध ने पाँच ब्राह्मण शिष्यों के साथ बौद्ध संघ की स्थापना की थी। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में संघ ने महती भूमिका का निर्वहन

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बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार

बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार परिचय बोधगया में ज्ञानोदय बाद महात्मा बुद्ध ने प्राप्त ज्ञान को लोगों तक पहुँचाने का निर्णय लिया। इसके लिए वे जीवनपर्यंत प्रयासरत रहे। बुद्ध वर्षा ऋतु में विभिन्न नगरों में विश्राम करते और शेष आठ माह एक स्थान से दूसरे स्थान भ्रमण करके अपने मत का प्रचार करते।   धर्मचक्रप्रवर्तन गया

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