जैन दर्शन

भूमिका जैन दर्शन अनीश्वरवादी है परन्तु अनात्मवादी नहीं है अर्थात् जैन दर्शन में ईश्वर की मान्यता नहीं है जबकि आत्माएँ अनन्त हैं। महावीर कर्मवाद और पुनर्जन्म विश्वास रखते हैं। जैन मत दार्शनिक दृष्टि से वस्तुतः ‘वस्तुवादी’ और ‘बहुसत्तावदी’ हैं। अर्थात् जितने प्रकार के द्रव्य हम देखते हैं वे सभी सत्य हैं। संसार में दो प्रकार के […]

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महाकाव्य युगीन धार्मिक दशा

कर्मकाण्डीय और ज्ञानमार्गीय धर्मों के सामंजस्य से महाकाव्यों ने एक लोकधर्म का विकास किया जो सर्वजन सुलभ था। इसमें वैदिक और अवैदिक विश्वासों का समावेश दिखता है।

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शैव धर्म

शिव से सम्बंधित धर्म को “शैव धर्म” और उनकी इष्ट मानकर पूजा करनेवाले “शैव” कहलाये। इस घर्म की प्राचीनता प्रागैतिहासिक काल तक जाती है। वर्तमान में ब्रह्मा और विष्णु के साथ शिव त्रिदेवों में सम्मिलित हैं। इनसे सम्बंधित व्रत महाशिवरात्रि और सोमवार है। तीसरे वर्ष मलमास लगता है। शिव में आर्य और आर्येत्तर तत्वों का समामेलन मिलता है। शिव की पूजा भारत में आसेतुहिमालय तक होती है।

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वैष्णव ( भागवत् ) धर्म

वैष्णव धर्म में विष्णु के १० अवतारों में श्रीराम और श्रीकृष्ण सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। इसमें अवतारवाद का विशेष महत्व है। सज्जनों की रक्षा , दुर्जनों का विनाश करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान समय समय पर अवतार लेते हैं।

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संस्कृत साहित्य के प्रमुख कवि तथा ग्रन्थ

इस लेख में प्राचीन भारत के प्रमुख कवि , नाटककार और लेखकों के साथ-साथ उनकी रचनाओं का संक्षिप्त विवरण देने का प्रयास किया गया है ।

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