जैन दर्शन
भूमिका जैन दर्शन अनीश्वरवादी है परन्तु अनात्मवादी नहीं है अर्थात् जैन दर्शन में ईश्वर की मान्यता नहीं है जबकि आत्माएँ अनन्त हैं। महावीर कर्मवाद और पुनर्जन्म विश्वास रखते हैं। जैन मत दार्शनिक दृष्टि से वस्तुतः ‘वस्तुवादी’ और ‘बहुसत्तावदी’ हैं। अर्थात् जितने प्रकार के द्रव्य हम देखते हैं वे सभी सत्य हैं। संसार में दो प्रकार के […]