जीवक चिन्तामणि (Jivaka Chintamani)
भूमिका जीवक चिन्तामणि संगमकाल के बहुत बाद की रचना है। इसकी रचना का श्रेय जैन भिक्षु तिरुत्तक्कदेवर को दिया जाता है। उपलब्ध तीन महाकाव्यों में से यह तृतीय महाकाव्य है। संक्षिप्त परिचय नाम — जीवक चिन्तामणि (Jivaka Chintamani) कवि — तिरुत्तक्कदेवर (Tiruttakkadevar) जैन धर्म से सम्बन्धित इसे ‘विग्रह का महाकाव्य’ या ‘विग्रह की पुस्तक’ कहा […]
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