मौर्योत्तर साहित्य
भूमिका मौर्योत्तर में प्राकृत, संस्कृत और तमिल भाषाओं में रचनाएँ मिलती हैं। प्राकृत भाषा में अभिलेख लिखवाये जा रहे थे परन्तु संस्कृत भाषा अब धीरे शासनादेश की भाषा बनती जा रही थी। आगे चलकर गुप्तकाल में संस्कृत राजकीय भाषा बनने वाली थी। पूर्व में जहाँ बौद्ध की भाषा पालि थी वहीं महायान शाखा की उत्पत्ति […]
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