संक्षिप्त परिचय
| प्राचीन नाम | अंकोटक (Ankotaka) |
| वर्तमान नाम | अकोट (Akota) |
| जनपद | वडोदरा (बड़ौदा) |
| राज्य | गुजरात |
| देश | भारत |
| स्थिति | विश्वामित्री नदी (Vishwamitri River) के दायें तट पर |

विवरण
जैसा कि हमें ज्ञात है कि प्रस्तर युग (Stone age) से ही सौराष्ट्र क्षेत्र में मानव निवास के साक्ष्य हमें मिलने लगते हैं। साबरमती, माही, नर्मदा और उनकी छोटी-छोटी सहायक नदियाँ जलस्रोत थीं और पास के पहाड़ी शैलाश्रय। ऐसे ही शैलाश्रय का उदाहरण हमें “पावागढ़ पहाड़ी” से मिले हैं।
विश्वामित्री नदी (Vishwamitri River) के दायें तट पर स्थित टीलों के समूह प्रस्तर कालीन मानव बस्तियों के साक्ष्य देते है, जो लगभग एक सहस्र ई०पू० जितने पुराने बताये गये हैं।
सन् ईसवी के प्रारम्भ के आसपास विश्वामित्री नदी के दाहिने तट पर एक छोटी बस्ती विकसित हुई। इस बस्ती का नाम अंकोटक (Ankotaka) मिलता है। अंकोटक (Ankotaka) की पहचान वर्तमान अकोट या अकोटा (Akota) से की गयी है।
वर्तमान बड़ौदा जनपद की उत्तरी सीमा पर माही नदी और दक्षिणी सीमा पर नर्मदा नदी प्रवाहित होती है। बड़ौदा नगर विश्वामित्री नदी तट पर बसा हुआ है। आख्यानों के अनुसार विश्वामित्री नदी का नाम प्रसिद्ध ऋषि विश्वामित्र के नाम पर पड़ा है। विश्वामित्री नदी बड़ौदा नगर के बीच से बहती है। अकोटा (अंकोटक) स्थल बड़ौदा (वडोदरा) नगर की सीमा में ही विश्वामित्री नदी के दाहिने तट पर स्थित है।
अंकोटक एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है, जिसकी गणना गुप्तकाल में “लाट विषय” के मुख्य नगरों में की जाती थी। लाट विषय दक्षिणी गुजरात में स्थित था।
“लाट विषयान्नगावृत-शैलाज्जगति प्रथित शिल्पाः [।]”
—श्लोक संख्या- ४; मंदसोर अभिलेख
इस स्थल के उत्खनन में जैन धर्म की अनेक प्राचीन धातु से निर्मित प्रतिमाएँ प्राप्त हुई थीं।
इन प्रतिमाओं में से कुछ का विवरण “General of Oriental Institute” में दिया गया है।
एक जिन-आचार्य की प्रतिमा पर यह अभिलेख उत्कीर्ण है—
“ओं देव धर्मोऽयं निदृत्ति कुले जिनभद्र वाचनाचार्यस्य।”
गुजरात के पुरातत्त्व विद्वान् श्री उमाकांत प्रेमानंद शाह का मत है कि ये जिनभद्र क्षमाश्रमण-विशेषावश्यक भाष्य के रचयिता ही हैं।
उमाकांत प्रेमानंद शाह इस प्रतिमा का निर्माणकाल, अभिलेख की लिपि के आधार पर ५५०-६०० ई० मानते हैं।
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