संक्षिप्त परिचय
| नाम | अंतर्गिरि (महाभारत में) |
| अन्य नाम | महाहिमवत (बौद्ध व जैन साहित्यों में) |
| वर्तमान नाम | महान हिमालय, बृहत् हिमालय, हिमाद्रि |
| उल्लेख | महाभारत, बौद्ध व जैन साहित्यों में |
| महत्त्व | इसमें गौरीशंकर, नंदादेवी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, त्रिशूल, धवलगिरी (धौलागिरि) इत्यादि चोटियाँ अवस्थित हैं। |
| स्थिति | लघु हिमालय के उत्तर और पार के दक्षिण |
विवरण
अंतर्गिरि हिमालय पर्वत का सर्वोच्च भाग है, जिसमें गौरीशंकर, नंदादेवी, केदारनाथ, बद्रीनाथ, त्रिशूल, धवलगिरी (धौलागिरि) इत्यादि चोटियाँ अवस्थित हैं। समुद्रतल से इनकी ऊँचाई २०,००० फुट से भी अधिक है।
महाभारत के सभापर्व (२७/३) में अंतर्गिरि का उल्लेख कुछ इस तरह मिलता है—
“अन्तर्गिरिं च कौन्तेयस्तथैय च बहिर्गिरिम्।
तथैवोपगिरिं चैव विजिग्ये पुरुषर्षभः॥”
— २७/३, सभापर्व; महाभारत
अर्थात् कुरुश्रेष्ठ धनंजय ने क्रमशः अन्तर्गिरि, बहिर्गिरि और उपगिरि नामक प्रदेशों पर विजय प्राप्त की।
इस प्रदेश को महाभारत के नायक अर्जुन ने अपनी दिग्विजय-यात्रा के प्रसंग में विजित किया था।
पालि (बौद्ध) साहित्य में अंतर्गिरि को महाहिमवत कहा गया है। जैन सूत्र ग्रंथ में भी इसको महाहिमवत कहा गया है।
वर्तमान में भूगोल का अध्ययन करते समय हम हिमालय वर्गीकृत करके अध्ययन करते हैं। ये दक्षिण से उत्तर की ओर इनके नाम क्रमशः इस तरह हैं—
- शिवालिक या बाह्य हिमालय (Shiwalik or outer Himalaya)
- मध्य या लघु हिमालय (Mid Himalaya)
- हिमाद्रि या बृहत् हिमालय (Great Himalaya)
- पार हिमालय (Trans Himalaya)
उपर्युक्त वर्गीकरण में हिमाद्रि या बृहत् हिमालय को ही अंतर्गिरि कहा गया है।
सम्बन्धित लेख